राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय के सातवें दीक्षांत समारोह में छात्रों से कहा कि भारतीय कला, संगीत और संस्कृति किसी भी राष्ट्र की पहचान हैं। इनके बिना देश का विकास अधूरा है।

उन्होंने युवाओं से अपनी कला, शोध और नए प्रयोगों से भारतीय विरासत को दुनिया में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने को कहा। राज्यपाल ने विलुप्त हो रहे लोक संगीत और पारंपरिक कलाओं को बचाने में योगदान देने की अपील भी की।

राज्यपाल ने कहा कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में युवाओं की अहम भूमिका है। उन्होंने गुरुजनों से भी गरीब, वंचित और प्रतिभावान बच्चों की मदद करने को कहा, ताकि उन्हें कला और संगीत में आगे बढ़ने का मौका मिले।

इस समारोह में तानसेन सम्मान से सम्मानित शास्त्रीय गायक पंडित अजय पोहनकर, संस्कृति एवं पर्यटन राज्यमंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी और विश्वविद्यालय की कुलगुरु प्रो. स्मिता सहस्त्रबुद्धे मौजूद रहे। शैक्षणिक सत्र 2024-25 और 2025-26 के 67 छात्रों को स्वर्ण पदक और 368 उपाधियां दी गईं। साथ ही, 14 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि से सम्मानित किया गया।

बजट की कमी दूर कराने का प्रयास करेंगे: लोधी

संस्कृति एवं पर्यटन राज्यमंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि विश्वविद्यालय के विद्यार्थी संगीत और कला के क्षेत्र में देश-दुनिया में ग्वालियर का नाम रोशन करेंगे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार विश्वविद्यालय के विकास के लिए प्रयास कर रही है।

यह महत्वपूर्ण संस्थान है, इसलिए इसके विकास में बजट की कमी आड़े नहीं आनी चाहिए। वे इस संबंध में मुख्यमंत्री से चर्चा करेंगे। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के सभागार भवन का निर्माण पूरा हो चुका है और जल्द ही मुख्यमंत्री इसका लोकार्पण करेंगे।

गुरु और माता-पिता को समर्पित किए स्वर्ण पदक

समारोह में स्वर्ण पदक हासिल करने वाले विद्यार्थियों ने अपनी सफलता का श्रेय गुरुजनों और माता-पिता को दिया। उज्जैन के शिप्रा फाइन आर्ट्स कॉलेज से बीएफए और एमएफए करने वाले पुनीत कदवाने ने दोनों पाठ्यक्रमों में स्वर्ण पदक हासिल किए हैं। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि उनके माता-पिता और गुरुजनों के आशीर्वाद का परिणाम है। वे भविष्य में फ्रीलांस आर्टिस्ट के रूप में अपनी पहचान बनाना चाहते हैं।

इसी कॉलेज की छात्रा शिवानी सोलंकी को पेंटिंग विषय में स्वर्ण पदक मिला। उन्होंने कहा कि यह पदक उनके गुरु और माता-पिता की मेहनत का परिणाम है। वह अपने गुरु के मार्गदर्शन में पेंटिंग के क्षेत्र में आगे बढ़ते हुए देश-दुनिया में अपनी पहचान बनाना चाहती हैं।

वहीं, इंदौर की कंदोत कॉर्नरवाल ने फैशन डिजाइनिंग में मेरिट सूची में प्रथम स्थान हासिल किया। उन्होंने बताया कि वह हैंडलूम उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने के लिए शोध और काम कर रही हैं।

पं. अजय पोहनकर की गायिकी ने मोहा मन

दीक्षांत समारोह में पंडित अजय पोहनकर ने सुमधुर भजनों और ठुमरी की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी गायिकी ने समारोह में संगीत का रंग भर दिया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को उपाधियां और पदक प्रदान करने के साथ ही कला-साधना, भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का संदेश दिया गया। कुलगुरु प्रो. स्मिता सहस्त्रबुद्धे ने इसे विश्वविद्यालय के लिए गौरवपूर्ण और ऐतिहासिक अवसर बताया। उन्होंने कहा कि राज्यपाल की उपस्थिति विद्यार्थियों और विश्वविद्यालय परिवार के लिए प्रेरणादायी है।